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Author: Ranveer Kumar
रंग लहरीया, मारो मनडो खेतलाजी मे लागो। दोहा – गाँव सोनाला जावनो, और लागी मन में आस, अरे पैदल पैदल जावता, आयो चैत्र वारो मास। ए रंग रा लेहरीया, मारो मनडो खेतलाजी मे लागो, ए रंग रा लेहरीया, मारो मनडो खेतलाजी मे लागो, ओ रंग रा लेहरीया, सोनाला मे होले सूरज ऊगो हा रे, रंग रा लेहरीया, सोनाला मे होले सूरज ऊगो, रंग रा लेहरीया, मारो मनडो खेतलाजी मे लागो।। अरे हा रे रंग रा लेहरीया, कोसेलाव ती पैदल संग तो आवे, अरे हा रे रंग रा लेहरीया, कोसेलाव ती पैदल संग तो आवे, ओ रंग रा लेहरीया, चेलोजी तो…
फकीरी रहत निश्चिन्त सदैश, देखण सुणन कहुँ सू न्यारा, चेतन फक्कड़ हमेशा।। सतगुरु मेहर करी मुझ सेती, दिया ज्ञान उपदेश, सोही ज्ञान श्रद्धा कर लीना, तजिया देश विदेश, फकीरी रहत निश्चिंत सदैश।। जो जो रूप बंधे सोई धूला, उरु अर परे मगेश, चौदह लोक इक्कीशु ब्रह्मांड, ये सब सगुण देश, फकीरी रहत निश्चिंत सदैश।। रंग रूप और नहीं आकारा, प्रकट छोड़ नहीं घेश, अप्रमाण और सुन्न समाना, निर्गुण कहिए विदेश, फकीरी रहत निश्चिंत सदेश।। देश विदेश भाव ये दोनु, मान्या मन हमेश, तीक्ष्ण खण्ड ज्ञान का गेही कर, परिया मन नरेश, फकीरी रहत निश्चिंत सदेश।। दवे भाव होता मन करघे,…
मन रे मत कर तन की बढ़ाई, बडा बडा योगेशर खपगा, तेरी कोन चलाई, मन मेरा मत कर तन की बढ़ाई।। हिर्णाखुश धरती पे योद्धा, रामजी को नाम छिपाई, उनके ओधर पहलाद जनमिया, नख से दिया मराई, मन मेरा मत कर तन की बढ़ाई।। एक बाण अर्जुन को चलता, सेष बाण बन जाइ, काबा गोपियां लूटन लागा, बाण चलन ना पाई, मन मेरा मत कर तन की बढ़ाई।। दस माथा जाके बीस भुजा थी, कुंभकर्ण बल भाई, तन रा गर्भ से लंका खो दी, संग चाल्यो ना कोई, मन मेरा मत कर तन की बढ़ाई।। राजा सागर के सेश पुत्र थे,…
स्वर्ग से सुन्दर धाम, जहाँ मैया का दरबार, दर्शन कर ले प्राणी, जीवन मिले ना बारम्बार।bd। तर्ज – सावन का महीना। सूरज की किरणे तेरी, ज्योति जगाए, चंदा की किरणे तेरी, आरती गाए, टिमटिम करते तारे, जैसे पायल की झंकार, दर्शन कर ले प्राणी, जीवन मिले ना बारम्बार।bd। भक्ति तेरी है मैया, गंगा की धारा, शक्ति तेरी है मैया, यमुना की धारा, भक्ति शक्ति के संगम में, जीवन का उद्धार, दर्शन कर ले प्राणी, जीवन मिले ना बारम्बार।bd। जल थल नभ सब, तेरे सहारे, ममतामई माँ तुझको, भक्त पुकारे, सुनले करुण पुकार मैया, कर दे बेड़ा पार, दर्शन कर ले…
मैं हूँ नहीं तेरे प्यार के काबिल, हो तेरे प्यार के काबिल, गुनाहगार हूँ,खतावार हूँ, मैं हूँ नही तेरे प्यार के काबिल।। अवगुन भरा शरीर मेरा में कैसे तुझे मिल पाऊँ, चुनरिया ये दाग दगीलि में कैसे दाग छुड़ाऊँ, ना भक्ति नहीं प्रेम रस हाँ कैसे तुझे मिल पाऊँ, आन पड़ा अब द्वार तुम्हारे अब किस द्वारे जाऊँ, उजड़ा हुआ गुलशन हूँ में, ना बहार के काबिल, मैं हूँ नही तेरे प्यार के काबिल।। वो दृष्टि नही है पास मेरे जो रूप तुम्हारा निहार सकूँ, वो तड़प नही है दिल अंदर जिस तड़प से तुझको पुकार सकूँ, वो आग नही…
हे राम भक्त हनुमान तुझे, मैंने तो अब पहचान लिया, तुम दुष्ट संहारक हो तेरा, भक्तों ने सहारा मान लिया।। तर्ज – दिल लुटने वाले। सुग्रीव बाली से डरकर जब, उस निर्जन गिरी पर रोता था, तब तू ही तो धीरज देकर ही, उसके दुखड़ो को हरता था, फिर राम से उसे मिलाया और, सुग्रीव को अभय प्रदान किया, हे राम भक्त हनुमान तुम्हे, मैंने तो अब पहचान लिया।। जब रावण ने मुनि वेश बना, माता सिता को हर डाला, हनुमत ने लंक जलाकर के, माता का संशय हर डाला, फिर चूड़ामणि लाए माँ की, प्रभु मन को भी विश्राम…
बजरंगबली तुमको, मेरा साथ निभाना है, सुख-दुःख अपना सारा, हमें तुमको सुनाना है, बजरंग बली तुमको, मेरा साथ निभाना है।। तर्ज – ना स्वर है ना सरगम है। है कोई नहीं जग में, तुमसा देवता दूजा, करते हैं सदा तेरी, सब नर-नारी पूजा, सबको तेरी महिमा, के गुण को गाना है, बजरंग बली तुमको, मेरा साथ निभाना है।। हो राम के सेवक तुम, और शिव के अवतारी, इस कलियुग में तेरी, है महिमा बड़ी भारी, हो संकट मोचन तुम, संसार ने जाना है, बजरंग बली तुमको, मेरा साथ निभाना है।। जिस पर हो दया तेरी, भवसागर तर जाये, सुमिरन जो…
ऐसी भक्ति है सतगुरु की, नर से नारायण करदे, नारायण करदे, नर से नारायण करदे, ऐसी भक्ति हैं सतगुरु की, नर से नारायण करदे।। माया अविध्या ईस जीव को, दोय लगे पर्दे, द्वेत उपाधि बात करें, ब्रह्म लक्ष्य निज धरदे, ऐसी भक्ति हैं सतगुरु की, नर से नारायण करदे।। दृढ़ अपरोक्ष जो तत्वों मसी का, लक्ष्य भाव भर दे, जीव भाव कर दूर हीनता, चेतन पद वर दे, ऐसी भक्ति हैं सतगुरु की, नर से नारायण करदे।। देह अभीमान शीश जिज्ञासु, गुरुचरणा दर्दे, जीवन मुक्ति रहे निज पद में, धर नही फिर दे, ऐसी भक्ति हैं सतगुरु की, नर से…
बड़ी दूर से चलकर आया हूँ, तर्ज – आवारा हवा का झोका हूँ बड़ी दूर से चलकर आया हू, मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए, मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए, एक फूल गुलाब का लाया हूँ, चरणों में तेरे रखने के लिए।। ना रंग महल की अभिलाषा, ना इक्छा सोने चांदी की, ना रंग महल की अभिलाषा, ना इक्छा सोने चांदी की, तेरी दया की दौलत काफी है, झोली मेरी भरने के लिए, बड़ी दूर से चलकर आया हूँ, मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए।। ना हिरे मोती सोना है, ना धन दौलत की थैली है, ना हिरे मोती…
प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए, राम सीता का दर्शन कराके मुझे, मेरे सपने को साकार कर दीजिए, प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए।। दुःख देते मुझे मेरे ही पाप है, मेरे मन में है क्या जानते आप है, आप हर रुप है इसलिए कर कृपा, मेरी हर एक संकट को हर लिजिए, प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए।। मैं भावुक तो हूँ पर नहीं भक्त हूँ, इसी कारण तो विषयों में आसक्त हूँ, वासना मुक्त…