Author: Ranveer Kumar

ये जीवन है श्यामा तेरे सहारे, चले जा रहे है किनारे किनारे, ये जीवन है श्यामा तेरे सहारे।। कृपा तेरी देखि जो बरसाने आकर, कृपा तेरी देखि जो बरसाने आकर, सब कुछ मिला श्यामा, दर तेरे आकर, तेरे सिवा ना कोई साथ हमारे। ये जीवन हैं श्यामा तेरे सहारे, चले जा रहे है किनारे किनारे, ये जीवन है श्यामा तेरे सहारे।। कर दो कृपा अब तो भानु दुलारी, कर दो कृपा अब तो भानु दुलारी, बरसाने वारी सुन लो, विनती हमारी, ये गुजरेगा जीवन सारा ब्रज तुम्हारे। ये जीवन हैं श्यामा तेरे सहारे, चले जा रहे है किनारे किनारे, ये…

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है सबसे शोभा न्यारी, रमण बिहारी की, जाऊं बार बार बलिहारी, मेरे रमण बिहारी की, हैं सबसे शोभा न्यारी, कुञ्ज बिहारी की, जाऊं बार बार बलिहारी, मेरे रमण बिहारी की।। मुस्काए मुरली बजाए, गुलाबी अधरों से, कस कस तीर चलाए, नशीली नजरों से, घुंघराली अलके, नागिन सी लटकारी की, जाऊं बार बार बलिहारी, मेरे रमण बिहारी की।। नख से शिख तक सिंगार, जड़ाऊ गहने है, काछनी बूटीदार, पीताम्बर पहने है, सिर साजे टेढ़ी पाग, नैन सुखकारी की, जाऊं बार बार बलिहारी, मेरे रमण बिहारी की।। तुम्हे साधन कर अपनाऊं, ये मेरे हाथ नहीं, तुम ही प्राणो के प्राण, ये झूठी बात…

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क्या खूब है आज सजाया, मिलकर दरबार लगाया, हम देख तेरा दरबार, दीवाने हो गए, हम देख तेरा श्रृंगार, दीवाने हो गए।। ये प्यारी प्यारी सूरत, है मेरे मन को भायी, देखी जो मैंने अपनी, सुध-बुध सारी बिसराई, ये मोटे मोटे नैना, क्या कर गए जादू टोना, हम करके तेरा दिदार, दीवाने हो गए, हम देख तेरा दरबार, दीवाने हो गए।। ये इसका नजर मिलना, फिर पलकों को झपकना, घायल कर देता मुझको, धीरे धीरे मुकसना, मुझपे ये श्याम सलोना, क्या कर गया जादू टोना, हम करके तेरा दिदार, दीवाने हो गए, हम देख तेरा दरबार, दीवाने हो गए।। ये…

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माँ का दर चूमकर, सारे गम भूलकर, मैंने अर्जी लगाई, मजा आ गया, दर बदर घूम कर, मैया के द्वार पर, मैंने झोली फैलाई, मजा आ गया।। तर्ज – मेरे रश्के कमर। सिंह पर बैठ कर माँ भवानी चली, दुष्ट दानव पे माँ की दुधारी चली, रण में संहार कर, दुष्टों को मार कर, मुण्डमाला बनाई, मजा आ गया।। माँ की कृपा के बादल बरस जायेंगे, सबके बिगड़े मुकद्दर संवर जायेंगे, बात बन जायेगी, झोली भर जायेगी, माँ से आशा लगाई, मजा आ गया।। आसरा इस जहाँ का मिले न मिले, माँ के दर पे ‘पदम्’ को ठिकाना मिले, आ…

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मोर मुकुट और तिलक विशाला, पग पैजनी बैजंती माला।। पूरण ब्रम्ह सकल अविनाशी, मंगल मूरत वो सुख राशि, श्याम वरण प्यारा नंदलाला, पग पैजनी बैजंती माला।। वो माधव वो मदन मुरारी, वो केशव गोवर्धन धारी, कान में कुंडल तिलक विशाला, पग पैजनी बैजंती माला।। मनहर मनहर काला काला, छीना मन मोरा भोला भाला, कहाँ छुपा ‘राजेन्द्र’ गोपाला, पग पैजनी बैजंती माला।। मोर मुकुट और तिलक विशाला, पग पैजनी बैजंती माला।। गीतकार / गायक – राजेंद्र प्रसाद सोनी।

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गुरुदेव पिलादी वो अमर ओम जड़ी, दोहा – सतगुरु मेरे सिर धनी, और पीरा से बड़ पीर, गुरु बगधारी धीर ने, गुरु आण बंधावे धीर। आण बंधावे धीर, खींचकर बाहर काडे, सोम शब्द सुनाएं, काग से हंस बनावे। गुरुदेव पिलादी वो अमर ओम जड़ी, मारा दाता पीलादी वो अमर ओम जड़ी, ओम जड़ी अमर ओम जड़ी, गुरुदेव पिलादी रे अमर ओम जड़ी।। चारों वेद ओम से जाणु, पूर्ण ब्रह्म ओम पहचाणु, सुरती भर माई रे अमर ओम जड़ी, गुरुदेव पिलादी रे अमर ओम जड़ी।। गीता में अर्जुन को पिलाई, सारा संचय दूर भगाई, सब रूप दिखाई रे अमर ओम जड़ी,…

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मानव ऐसी करनी कर रे, पाछे लोग करें गुणगान। दोहा – गुजरान भलो दुख दिन पणे, कर काज अनीति कमावणो ना, निजी स्वार्थ कारण भूल कबू, कर घात न जीव सतावणो ना। कहीं बंधु समाज ने मीत सगो, इन काज न धर्म हटावणो ना, दिन चार यहां उपकार करो, फिर भारती पूरण आवणो ना। क्या परदेसी की प्रीत, पूस का तापणा, उठ चले प्रभात, कोई नहीं आपणा। इन सरवर की पाल, हंस दो दिन पावणा, शत-शत भणे कबीर, फिर नहीं आवणा। मानव ऐसी करनी कर रे, पाछे लोग करें गुणगान।। दानव बन मत जीव सतावे, सब घट में भगवान, आत्म…

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कृष्ण मुरारी जी, आंख बसे मन भावे, बांके बिहारी जी, आंख बसे मन भावे।। पिली कम्बलिया मोर मुकुट, घनश्याम गगन के रंग सजाये, साँझ ना दिखे श्याम सांवरा, दिन भर नंद की धेनु चरावे, तन मन वारी जी, आंख बसे मन भावे, मैं तो हारी जी, आंख बसे मन भावे।। नींद उणी दे जग के कारज, कद ते सोचूं श्याम की सोचूं, रसिया जोगी कान्हा बजावे, मुरली बोल हिये तक पहुंचे, रास बिहारी जी, आंख बसे मन भावे, शोभा न्यारी जी, आंख बसे मन भावे।। तन मन प्राण हवाले तेरे, तुझमे रमावे पल छीन माधव मदन गोवर्धन धारी, दरस में…

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जगदम्बा के दीवानो को, दरश चाहिए, दरश चाहिए, हमें माँ तेरी एक, झलक चाहिए, झलक चाहिए।। तर्ज – दीवाने है दीवानो को। दया और ममता का मंदिर है तू, तुझे क्या पता कितनी सूंदर है तू, गुलाबों के माँ जैसा मन है तेरा, हमे माँ तेरे जैसा मन चाहिए, जगदम्बा के दीवानों को, दरश चाहिए, दरश चाहिए।। तेरा रूप सबसे सुहाना लगे, बिना भक्ति के जी कही ना लगे, माँ भक्ति में तेरे हम डूबे रहे, हमें ऐसा तुझसे माँ वर चाहिए, जगदम्बा के दीवानों को, दरश चाहिए, दरश चाहिए।। कई दैत्य तुमने पछाड़े है माँ, तेरा शेर रण में…

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कहावत कर देती अहसास, इस ज़माने को, समय कर देता है मोहताज, दाने दाने को।। तर्ज – कोई पत्थर से ना मारे। सखा बचपन के, सुदामा और नन्दलाल हुए, मित्रताई की, इस जहान में मिसाल हुए, भरी रस भावना से, भाव कैसे बदलते, चतुर चितचोर से ही, सुदामा चाल चलते, गुरुमाता दिए थे जो, चना चबाने को, सुदामा हो गए मोहताज, दाने दाने को।। कहाँ कब हो क्या, किसी ने नहीं देखा कल को, दुखी दिन कैसे, दिखा दिए राजा नल को, पास सबकुछ था जिनके, रहे वो हाथ मलते, भुजी मछली भी जल में, चली जाती उछल के, जल…

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