imran थारी मेलोड़ी चादर धोय समझ मन मायला रेBy Ranveer KumarAugust 5, 20230 थारी मेलोड़ी चादर धोय, दोहा – मन लोभी मन लालची, मन चंचल मन चोर, मन के मते नही चालिये, पलक…