Author: Ranveer Kumar

दुनिया क्या देखते हो, खाटू में आके देखो ना, बाबा की नगरी अगर जाएगा, बाबा की नगरी अगर जाएगा, बिगड़ा मुक़द्दर संवर जाएगा, झुकने ना दे सर जहान में, इसके दर पे झुका के देखो ना, खाटू में आके देखो ना, दुनियाँ क्या देखते हो, खाटू में आके देखो ना।। तर्ज – चेहरा क्या देखते हो। भक्तों के प्यारे का, सबके सहारे का, जब तुझको दीदार हो जाएगा, बाबा की तुझपे पड़ेगी नज़र, फिर तू भी भव पार हो जाएगा, हारे का साथी है बाबा, ये रिश्ता निभा के देखो ना, खाटू में आके देखो ना, दुनियाँ क्या देखते हो,…

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भस्म तेरे तन की, बन जाऊं भोलेनाथ, भक्ति में तेरी, रम जाऊं भोलेनाथ, शाम सुबह गुण तेरा, गाऊं भोलेनाथ, भक्ति में तेरी, रम जाऊं भोलेनाथ।bd। bhasm tere tan ki ban jau bholenath तर्ज – श्याम तेरी बंसी। जब जब तू भंगिया को, हाथ से लगाए, प्याले के रूप में तू, मुझको ही पाए, जैसा तू ढाले, ढल जाऊं भोलेनाथ, भक्ति में तेरी, रम जाऊं भोलेनाथ।bd। खोया रहूं भोले, सेवा में तेरी, अंतिम यही है, अभिलाषा शिव मेरी, धूल तेरे पग की, बन जाऊं भोलेनाथ, भक्ति में तेरी, रम जाऊं भोलेनाथ।bd। कर दूँ ये जीवन, मैं तुझको समर्पण, तेरा दिया कर…

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औघड़ बम बम बम, औघड बम बम बम, भांग धतूरा पिए हलाहल, भांग धतूरा पिए हलाहल, और लगाए दम, औघड बम बम बम, औघड बम बम बम।। तीन लोक के नाथ कहाओ, शिव भोले वरदानी तुम, लाखो पापी तुमने तारे, दाता बड़े हो दानी तुम, दास समझकर हमें तार दो, दास समझकर हमें तार दो, भोले कम से कम, औघड बम बम बम, औघड बम बम बम।। भक्तों के रखवाले तुम हो, तुमको सदा ही पूजा है, पालनहारा सिवा तुम्हारे, और ना जग में दूजा है, नाम तुम्हारा हम रटते हैं, नाम तुम्हारा हम रटते हैं, शिव भोले हर दम,…

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शंकर मेरे जगत पिता है, पारवती मेरी माता, पारवती मेरी माता।। तर्ज – मेरे नैना सावन भादो। दर तेरे आता हूँ, आरती गाता हूँ, चरणों में तेरे, धोक लगाऊं, दर्श तेरा मैं चाहता, क्यों ना तरस तुझे आता, तुम बिन मेरा कौन सहारा, पारवती मेरी माता, पारवती मेरी माता।। अवगुण चित ना धरो, सिर पर हाथ धरो, मैं हूँ पापी और दुष्कर्मी, खोल ना मेरा खाता, सुनले जग के विधाता, मेरी नैया डगमग डोले, क्यों नहीं पार लगाता, पारवती मेरी माता, पारवती मेरी माता।। धीर बंधाओ ना, हाथ फिराओ ना, नैनो से बहे जल की धारा, क्यों ना तरस तुझे…

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थारी नगरी में साँवरिया, नाँचू दोनू आँख्या मीच, ओ दोनू आँख्या मीच, साँवरा दोनू आँख्या मीच, थारी नगरी में साँवरिया, नाँचू दोनू आँख्या मीच।। बिन दर्शन मनड़ो नहीं माने, जी भर मायो म्हारो क्याने, नैण नचावे छाने छाने, अण समझी मैं लई रे कन्हैया, बेल प्रीत की सींच। ओ थारी नगरी मे साँवरिया, नाँचू दोनू आँख्या मीच।। थारे से भीतर लो मिलग्यो, चाण चुकी चुपके स हिलग्यो, लटक देख मेरो मन खिलग्यो, घणी दूर से आयो हूँ प्रभु, क्यां की खिंचम खींच। ओ थारी नगरी मे साँवरिया, नाँचू दोनू आँख्या मीच।। मैं नाचूं मेरो मनड़ो नाचे, संसारी सब थाने जांचे,…

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श्याम तू क्या जाने, खड़ा है कोने में एक दास, हसरत से वो तुमको देखे, हसरत से वो तुमको देखे, करे यही अरदास, श्याम तू क्या जानें, खड़ा है कोने में एक दास।। आँख से आंसू वो ढलकाए, बात जिया की कह नहीं पाए, बात जिया की कह नहीं पाए, कैसे बताऊँ क्यों है उसका, मनवा आज उदास, श्याम तू क्या जानें, खड़ा है कोने में एक दास।। फुरसत हो सुनले अफसाना, चोंट जिगर की देखले कान्हा, चोंट जिगर की देखले कान्हा, जान के तुमको अपना बाबा, आया तेरे पास, श्याम तू क्या जानें, खड़ा है कोने में एक दास।।…

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जाना है मुझे माँ के दर पे, सुनो बाग के माली, मेरी माँ के लिए, माला पिरो दे अजब निराली, पहन जिसे खुश हो जाए, मेरी मैया शेरावाली, मेरी माँ के लिए, माला पिरो दे अजब निराली।। भांत भांत के फूल और कलियाँ, चुन बगिया से लाना, श्रद्धा के धागे में प्रेम की, सुई से फूल सजाना, मुंह माँगा तुझे दाम मैं दूंगा, मुंह माँगा तुझे दाम मैं दूंगा, बात नहीं डर वाली, मेरी माँ के लिए, माला पिरो दे अजब निराली।। गेंदा गुलाब चमेली चम्पा, मरुआ और गुलद्वारी, सूरजमुखी रात की रानी, मोतिया जूही कचनारी, संदल कमल मोगरा संग…

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आज देवल में बाजा बाजे, बाजे मंदिर रे माई, आवो नी म्हारा साचा भोमिया जी, ईती कठ देर लगाई।। सूरज सामी थारो धाम कहीजे, गांव राणेरी रे माई आवो नी म्हारा साचा भोमिया जी, ईती कठ देर लगाई।। धुप दिप ले करां आरती, दिवला री जोत जलाई, आवो नी म्हारा साचा भोमिया जी, ईती कठ देर लगाई।। कुमकुम कैरी गार घलावां, चंदन सुं निंपाई, आवो नी म्हारा साचा भोमिया जी, ईती कठ देर लगाई।। चोटीवाला चढ़े नारियल, चुरमें रो भोग लगाई, आवो नी म्हारा साचा भोमिया जी, ईती कठ देर लगाई।। राजेश लटियाला थारो भजन बनायो, रवि सोढ़ा महिमा सुनाई,…

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भोले बाबा की निकली बारात है, भुत प्रेत है बाराती क्या बात है, निकली बारात है, वाह वाह क्या बात है, भोलें बाबा की निकली बारात है, भुत प्रेत है बाराती क्या बात है।। तर्ज – काली कमली वाला मेरा। नंदी पर असवार हुए है, सजधज कर तैयार हुए है, आए दूल्हा बनकर भोलेनाथ है, भुत प्रेत है बाराती क्या बात है, भोलें बाबा की निकली बारात है, भुत प्रेत है बाराती क्या बात है।। भस्म भभूती लिपटे तन में, सर्पो की माला है पहने, डम डम डमरू सोहे उनके हाथ है, भुत प्रेत है बाराती क्या बात है, भोलें…

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वो जो नंदी की करता सवारी, मेरा भोला सा भोला भंडारी, शीश पर जिसने गंगा उतारी, वो जो नन्दी की करता सवारी, मेरा भोला सा भोला भंडारी।। जिसका कैलाश पर्वत है डेरा, वो है हर हर महादेव मेरा, है गले जिसके सर्पों की माला, चन्द्रमा का है माथे उजाला, जिसके चरणों में है दुनिया सारी, मेरा भोला सा भोला भंडारी, वो जो नन्दी की करता सवारी, मेरा भोला सा भोला भंडारी।। सारी दुनिया है जिसकी दीवानी, उसकी महिमा ना जाए बखानी, कोई शम्भू कहे कोई शंकर, कोई कहता उसे औघड़ दानी, जिसके चरणों के हम सब भिखारी, मेरा भोला सा…

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