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Author: Ranveer Kumar
राम राम बोल प्यारे राम राम बोल, हनुमान जी को पाना है तो राम राम बोल।। राम जी के अंग संग रहते हनुमान है, राम जी के अंग संग रहते हनुमान है, जहाँ मेरे राम जी वहां हनुमान है, राम राम बोल प्यारें राम राम बोल, हनुमान जी को पाना है तो राम राम बोल।। युग युग का राम हनुमान जी का साथ है, युग युग का राम हनुमान जी का साथ है, वीर हनुमान के सर राम जी का हाथ है, राम राम बोल प्यारें राम राम बोल, हनुमान जी को पाना है तो राम राम बोल।। हनुमान जी…
खाटू में मोरनी बनके, मैं तो छम छम नाचूं, मैं तो छम छम नाचूं, सांवरिया तेरी याद में, जोगन बन मैं गाऊं, खाटु में मोरनी बनके, मैं तो छम छम नाचूं, मैं तो छम छम नाचूं।। तर्ज – सावन में मोरनी बनके। खाटू की गलियों में, श्री श्याम की जलती है ज्योति, बिन मौसम के बाबा, अमृत की है वर्षा होती, प्रेमी बन जो कोई है आता यहाँ, आकर के भूल गया वो सारा जहाँ, खाटु में मोरनी बनके, मैं तो छम छम नाचूं, मैं तो छम छम नाचूं।। तुम इतनी किरपा करना, खाटू बुलाते रहना, बन माझी नैया को,…
बाबा तस्वीर तेरी, लागे बड़ी प्यारी।। मैं तेरी सुंदर मूर्ति लाया, तेरे मंदिर में उस को सजाया, वाहे तस्वीर बड़ी-बड़ी बलधारी, बाबा तस्वींर तेरी, लागे बड़ी प्यारी।। जब कोई चिंता हमको सतावः, तेरी तस्वीर को शीश झुकावं, वाहे तस्वीर सारे कष्ट मिटा री, बाबा तस्वींर तेरी, लागे बड़ी प्यारी।। मन मंदिर में आसण लगाया, उस प तेरी तस्वीर को सजाया, वाहे तस्वीर मन्नै रस्ता बतारी, बाबा तस्वींर तेरी, लागे बड़ी प्यारी।। तेरी तस्वीर के दीवाने हैंं सारे, जिसकी ताकत जानी ना जारे, उस तस्वीर के हम बड़े पुजारी, बाबा तस्वींर तेरी, लागे बड़ी प्यारी।। बाबा तस्वीर तेरी, लागे बड़ी प्यारी।।…
ऊँचे ऊँचे भवनों बैठी रुप अनेकों धारे, चरण चाकरी कर लो भैया, हो जाए वारे न्यारे, बोलो जय जयकारे, माँ के बोलो जय जयकारे।। तर्ज – कान में झुमका चाल में। शेर पर मैया चढ़ी चढ़ी, ज्योति सवाई बड़ी बड़ी, आने वाली है मेरी, माई आने वाली है, लाल चुनरिया जड़ी जड़ी, देखी दुनिया खड़ी खड़ी, शेरोवाली मैहरोवाली, माई लाटावाली है, कलकत्ते काली, जोतावाली माता ज्वाला, जम्मू में माता वैष्णो वाली है, विंध्यवासिनी विंध्याचल की, गुवाहाटी कामाख्या, मनसा माता नैना देवी, शैलसुता माँ साख्या, बोलो जय जयकारे, माँ के बोलो जय जयकारे।। दयालु बड़ी माँ दयालु बड़ी, माता करुणामयी कंजका…
बांके बिहारी श्री वृन्दावन में, हाये मेरा दिल खो गया। दोहा – हरे कृष्ण सदा कहते कहते, मन चाहे जहाँ वहाँ घुमा करूँ, मधुमोहन रूप रस पीकर के, उनमे उन्मत हो रुमा करूँ। मन मंदिर में बिठला के तुम्हे, पग तेरे निरंतर चूमा करूँ, अति सुन्दर वेश ब्रजेश तेरा, रहा रोम ही रोम में रुमा करूँ। बांके बिहारी श्री वृन्दावन में, हाये मेरा दिल खो गया, दिल खो गया दिल खो गया, दिल खो गया दिल खो गया।। तर्ज – ओ साहिबा। यहाँ यमुना किनारा है, श्री निधिवन प्यारा है, कण कण में बिहारी जी, यहाँ तेरा नज़ारा है, दिल…
जब होती करुण पुकार, सांवरा आता है, जब पड़ती है दरकार, सांवरा आता है, आता है वो आता है, आता है वो आता है, जब होती करुंण पुकार, सांवरा आता है।। तर्ज – मेरी लगी श्याम संग। द्रोपदी पे जब विपदा आई, व्याकुल हो गई अबला नारी, श्याम बचा लो लाज हमारी, झटपट आए कृष्ण मुरारी, और बढ़ गया चिर अपार, सांवरा आता है, जब होती करुंण पुकार, सांवरा आता है, जब पड़ती है दरकार, सांवरा आता है।। नानीबाई ने इसे बुलाया, सेठ सांवरा बन कर आया, अरब खरब का भात ये लाया, नरसी भगत का मान बढ़ाया, करे भक्तो…
गुरुजी मेरा बंधन छोड़ाया रे, दोहा – सन्त बड़े परमार्थी, शीतल वांरा अंग, तप्त बुझावे और कि, दे दे अपनो रंग। गुरुजी मेरा बंधन छोड़ाया रे, शब्द सुणाया निज नाव का, उर में लिव लाया रे, गुरुजी मेरा बन्धन छोड़ाया रे।। कर चेतन गुरु शब्द जिलाया, त्रिगुण ढहाया ए, रंग लग्या गुरु ज्ञान को जब, मन को पढ़ाया ए, गुरुजी मेरा बन्धन छोड़ाया रे।। रोगी का रोग मिटाय के, गुरु अमृत पाया ए, आनंद भया दिल मायने, सुखसागर नहाया ए, गुरुजी मेरा बन्धन छोड़ाया रे।। सागर नहाया तप्त बुझाया, दुत्ये भ्रम मिटाया ए, सुन्न में धुन लगी उन्मुन ए, केवल…
अरजी सुणज्यो जी त्रिपुरार, थे तो भूतों के सरदार, थारी महिमा अपरंपार, धतूरों बोयो बन में, धतूरों बोयो बन में, भांगडली सरणाई रे शिव, थारा नैना में।। था र बैला की असवारी, म्हाने ला ग बहोत सुप्यारी, नाग बिराजै गल म, धतूरों बोयो बन म, भांगडली सरणाई रे शिव, थारा नैना में।। था र गौरा छ अर्धङ्ग, शंकर नित उठ पीवो भंग, भष्मी रमाओ तन म, भष्मी रामाओ तन म, धतूरों बोयो बन म, भांगडली सरणाई रे शिव, थारा नैना में।। था र डम डम डमरू बाजै, था र पगां घूघरा बाजै, गिरजा सोहे संग म, नारी सोहे संग म,…
नंदी की करके सवारी, डमरू वाला रे, है गले में लिपटा नाग, भुजंगा काला रे, है गले में लिपटा नाग, भुजंगा काला रे।। तर्ज – सपने में रात में आया। आए है ब्याह रचाने, गौरा को अपना बनाने, है भुत प्रेत सब संगी, करते है बड़ी हुड़दंगी, क्या अद्भुत रूप बनाया, अद्भुत रूप बनाया डमरू वाला रे, है गले में लिपटा नाग, भुजंगा काला रे, है गले में लिपटा नाग, भुजंगा काला रे।। जब देखि मैना रानी, हुई दिल में बड़ी हैरानी, बिटिया के भाग फुट गए, कैसी किस्मत चकरानी, ना ब्याहु पारवती को, ब्याहु पारवती को डमरू वाला रे,…
माँ मैं तेरी कठपुतली, तेरा हुक्म बजाऊंगी, तू डोर हिलाना मावड़ी, मैं नाच दिखाऊगी, माँ मै तेरी कठपुतली।। तर्ज – आ जाओ भोले बाबा मेरे। मेरा वजूद कुछ नहीं, मैं जड़ हूँ मावड़ी, माँ तेरे एक इशारे पे, चेतन हो जाऊंगी, तू डोर हिलाना मावड़ी, मैं नाच दिखाऊगी, माँ मैं तेरी कठपुतली।। मेरी नकेल तो, तेरे हाथों में है मईया, तू चाहे जिधर घुमा ले, मैं घूम जाऊंगी, तू डोर हिलाना मावड़ी, मैं नाच दिखाऊगी, माँ मैं तेरी कठपुतली।। तेरे ‘हर्ष’ को दरबार में, जितना नचा लेना, दुनिया में नहीं नचाना, मैं थिरक ना पाऊँगी, तू डोर हिलाना मावड़ी, मैं…