Author: Ranveer Kumar

In the end, the act of crafting a heartfelt farewell message for a departing coworker serves as a poignant reminder of the profound connections and shared moments that define our professional lives. It is a testament to the remarkable fusion of professionalism and genuine friendship that often blossoms within the workplace. As we bid farewell to a cherished colleague, we embrace the sadness of parting while nurturing the hope for future reunions. These messages, filled with gratitude, fond memories, and warm wishes, not only express our deep emotions but also serve as enduring tokens of the meaningful relationships that enrich…

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कौन जाने मैया रानी, जाने किस पे कृपा कर दे, वो चाहे उजड़े गुलशन को, हरा भरा कर दे, वो चाहे उजड़े गुलशन को, हरा भरा कर दे।। तर्ज – झूठ बोले कौवा काटे। नर तन देकर धन्य किया, और धन्यवाद इस वाणी के, किस्मत में माँ का प्यार मिला, और दर्शन मैया रानी के, तन मन अर्पण आत्मसमर्पण, जो ख़ुशी ख़ुशी कर दे, वो चाहे उजड़े गुलशन को, हरा भरा कर दे। कौन जाने मईया रानी, जाने किस पे कृपा कर दे, वो चाहे उजड़े गुलशन को, हरा भरा कर दे।। दरबार बहुत देखे जग में, पर ये दरबार…

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तू साथ है मेरे, मेरी हार नहीं होगी, ये अर्ज है मेरी, बेकार नहीं होगी, सांवरे तुझसे मेरी आस है, सांवरे तू तो मेरे पास है।। तर्ज – मिलना हमें तुमसे। द्रोपदी ने जब तुमको, रो रो बुलाया था, बहना का भाई बन, मेरा श्याम आया था, दरबार में बहना, शर्मसार नहीं होगी, ये अर्ज है मेरी, बेकार नहीं होगी, सांवरे तुझसे मेरी आस है, सांवरे तू तो मेरे पास है।। जब साथ है तेरा, दुःख हो नहीं सकता, तू पार लगाए ना, ये हो नहीं सकता, बच्चो की हार तुम्हें, स्वीकार नहीं होगी, ये अर्ज है मेरी, बेकार नहीं…

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सुनले कन्हैया अर्जी हमारी, तारो ना तारो ये है, मर्ज़ी तुम्हारी, सुन ले कन्हैया।। तर्ज – सागर किनारे दिल ये पुकारे। हमपे क्या बीती, कैसे बताए, किस दौर से गुज़रे, कैसे सुनाए, तुम को पता है हाल मुरारी, सुन ले कन्हैया अर्जी हमारी, तारो ना तारो ये है, मर्ज़ी तुम्हारी, सुन ले कन्हैया।। लाज पे आँच बाबा, आने ना पाए, जाए तो जान जाए, आन ना जाए, सारा जमाना इसका शिकारी, सुन ले कन्हैया अर्जी हमारी, तारो ना तारो ये है, मर्ज़ी तुम्हारी, सुन ले कन्हैया।। लाज की भिक्षा, झोली में दे दो, भटक रहा हूँ, शरण में ले लो,…

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जो मात पिता से जोड़े प्रीत, उसे भगवन मिल जाते है, होती जग में उसी की जीत, होती जग में उसी की जीत, उसे भगवन मिल जाते है, जो मात पिता से जोडे प्रीत, उसे भगवन मिल जाते है।। तर्ज – आ लौट के आजा। सेवा में इनकी जीवन बिता ले, अपना ये धर्म निभाना, मात पिता का आशीष पा ले, दिल को ना इनके दुखाना, ना इनके जैसा मिलेगा कोई, वो जो तेरा भला चाहते है, जो मात पिता से जोडे प्रीत, उसे भगवन मिल जाते है।। दिल में तू इनकी मूरत बसा ले, जन्म सफल होगा तेरा, पूण्य…

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म्हारा पियर में साहिबा, बोई गणगौर, आसि बोल रही कोयलिया, नाचि रया मोर, म्हारा पियर म साहिबा, बोई गणगौर।। मैया और बाबुल की, याद घनी आव, याद घनी आव, मख चैन नहीं आव, म्हारा बाबुल का आंगन में, नाच रया मोर, म्हारा पीहर म साहिबा, बोई गणगौर।। भाई कीरसानिया की, याद घनी आव, याद घनी आव, मख चैन नहीं आव, कीरसानिया का आंगन में, नाचीरया मोर, म्हारा पीहर म साहिबा, बोई गणगौर।। भाई झमरालिया की, याद घनी आव, याद घनी आव मख, चैन नहीं आव, झमरालिया का आंगन में, नाचीरया मोर, म्हारा पीहर म साहिबा, बोई गणगौर।। भाई सुनारया की,…

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आओ जी गणराज विनायक, बैठो बेगा पाट, ठाट तुम कर देना।। सबसे प्रथम गवरी नंद मनाऊं, कथा कीर्तन में नूत बुलाऊं, आय सुधारो काज आज मैं, जोहूं तिहारी बाट, ठाट तुम कर देना।। तुमहो अनंत आदि अनादी, सब देवन में अगवाणी गादी, विघ्न हटा रख लाज, गाज कर दे दुश्मन दे डाट, ठाट तुम कर देना।। सृष्टि रची तब प्रथम पुजाया, यादव पति ने आय मनाया, देवन के सिरताज लूटियो, रामा रस को हाट, ठाट तुम कर देना।। रिद्धि सिद्धि राण्यां के संघ सिधारो, मूसे चढ़ दाता बेगा पधारो, श्री ‘भैरव’ जोवे बाट, खोल दो हृदय ज्ञान कपाट, ठाट तुम…

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अरि सब सब देवन तो री, गोठा में पूजाज्ञा, म्हारा बालाजी पूजाज्ञा, कामखेड़ा में, बेगि बेगि आज म्हारा, भजना में।। अरि अल्ला री पल्ला ने, भाभी नीचो री रालल, थारा चपला ने खोलदे, गराला में, बेगि बेगि आज म्हारा, भजना में।। अरे दौराण्या जेठान्या ने, लारा लेले, गीत गाओ री लुगायां, अड़गाल्या में, बेगि बेगि आज म्हारा, भजना में।। अरे सासु जी नणद ने, लारा लेले, कोई आरती सजाई लाओ, थाल्या में, बेगि बेगि आज म्हारा, भजना में।। मन्दिरया में बाबा थारो, देवरो बन्यो रे, कोई पारीक न बुलाई, लाओ भजना में, बेगि बेगि आज म्हारा, भजना में।। अरि सब…

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जरा सामने तो आओ छलिये, छुप छुप छलने में क्या राज़ है, यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा, मेरी आत्मा की ये आवाज़ है, जरा सामने तो आओ छलिये।। हम तुम्हें चाहे तुम नहीं चाहो, ऐसा कभी ना हो सकता, पिता अपने बालक से बिछुड़ के, सुख से कभी ना सो सकता, हमें डरने की जग में क्या बात है, जब हाथ में तिहारे मेरी लाज है, यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा, मेरी आत्मा की ये आवाज़ है, जरा सामने तो आओ छलिये।। प्रेम की है ये आग सजन जो, इधर उठे और उधर लगे, प्यार का है ये तार पिया…

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खाटू आना जाना जब से बढ़ गया, श्याम प्रेम का मुझ पे भी, रंग चढ़ गया, रंग चढ़ गया, रंग चढ़ गया, रंग चढ़ गया, श्याम का, खाटु आना जाना जब से बढ़ गया, श्याम प्रेम का मुझ पे भी, रंग चढ़ गया।। तर्ज – दिल दीवाना ना जाने कब। पहले तो हम साल में, एक दो बार मिल पाते थे, यादों के सहारे ही, अपना वक्त बिताते थे, दिल में है क्या, ये पढ़ लेता, जब चाहे बुला लेता, रंग चढ़ गया, रंग चढ़ गया, रंग चढ़ गया, श्याम का, खाटु आना जाना जब से बढ़ गया, श्याम प्रेम…

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